मुझे मेरे गांव क़ी याद आई,
बड़े लंबे इंतजार के बाद,
आखा तीज आएगी,
सखिया सारी पड़पॅंच मे पड़ जाएगी ,
कई होगी पराई तो कई गांव मे आएगी,
कहियों के होंगे पीले हाथ इस बार,
पनघट सुना होगा कौन बतियाने आएगी,
मुझे मेरा आज बचपन याद आया,
गांव क़ी गौरियों को था मैने बहुत सताया,
कभी बिन प्यासे खूब पानी पी आया,
कभी भीगे हुए बदन से था पल्लू सरकाया
मुझे वो बहुत याद आती है पर अब,
जब भी जाता हूँ कुछ पराई सी,
नज़र आती है सब जुदा हो गयी,
मैं भी सौचता हूँ अब न करूँगा छेड़खानी,
बचपन तो कब का गया आ गई जवानी,
"कुम्प"को गांव क़ी याद आई,
बड़े दिनो के बाद आखा तीज आई
बड़े लंबे इंतजार के बाद,
आखा तीज आएगी,
सखिया सारी पड़पॅंच मे पड़ जाएगी ,
कई होगी पराई तो कई गांव मे आएगी,
कहियों के होंगे पीले हाथ इस बार,
पनघट सुना होगा कौन बतियाने आएगी,
मुझे मेरा आज बचपन याद आया,
गांव क़ी गौरियों को था मैने बहुत सताया,
कभी बिन प्यासे खूब पानी पी आया,
कभी भीगे हुए बदन से था पल्लू सरकाया
मुझे वो बहुत याद आती है पर अब,
जब भी जाता हूँ कुछ पराई सी,
नज़र आती है सब जुदा हो गयी,
मैं भी सौचता हूँ अब न करूँगा छेड़खानी,
बचपन तो कब का गया आ गई जवानी,
"कुम्प"को गांव क़ी याद आई,
बड़े दिनो के बाद आखा तीज आई
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