शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

आखा तीज आई

मुझे मेरे गांव क़ी याद आई,
बड़े लंबे इंतजार के बाद,
आखा तीज आएगी,
सखिया सारी पड़पॅंच मे पड़ जाएगी ,
कई होगी पराई तो कई गांव मे आएगी,
कहियों के होंगे पीले हाथ इस बार,
पनघट सुना होगा कौन बतियाने आएगी,
मुझे मेरा आज बचपन याद आया,
गांव क़ी गौरियों को था मैने बहुत सताया,
कभी बिन प्यासे खूब पानी पी आया,
कभी भीगे हुए बदन से था पल्लू सरकाया
मुझे वो बहुत याद आती है पर अब,
जब भी जाता हूँ कुछ पराई सी,
नज़र आती है सब जुदा हो गयी,
मैं भी सौचता हूँ अब न करूँगा छेड़खानी,
बचपन तो कब का गया आ गई जवानी,
"कुम्प"को गांव क़ी याद आई,
बड़े दिनो के बाद आखा तीज आई

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

बीते हुए लम्हे

कुम्प के दिल मे जख्म कर दिया है यादों ने,
वरना मुझे भूल जाने का ख्याल तो आया था
बीते हुए लम्हे यूँ याद आ रहे है,
मुँह फेरकर वो जैसे कुछ मुस्करा रहे है

शनिवार, 2 अप्रैल 2011

पानी अच्छा है यहाँ का न हवा अच्छी

कैसे इस बस्ती मे मेरा गुज़ारा होगा..................!
पानी अच्छा है यहाँ का न हवा अच्छी है

खोई हुई वो पहचान हूँ मैं

हर एक सुबह निकल पड़ता है जो खुद क़ी तलाश मे
वो खोई हुई वो पहचान हूँ मैं.................................
ना आँखों मे ख्वाब है ना दिल मे तमन्ना है कोई,
अपनी बनाई हुई राहों से हीं अंजान हूँ मैं.............
कभी ज़रा सी भी बात पर आँसू बहा देता था मैं,
आज रह मे पड़ी लाश क़ी तरह बेजान हूँ मैं........
आँखो मैं ख्वाब संजोने क़ी भी सज़ा हुई है मुझे,
खिलने से पहले ही टूट जाए एक ऐसा अरमान हूँ मैं..........
किस कदर फरेब करता है समुंदर एक कश्ती से,
इस जिंदगी के हर एक ज़ुल्म का निगहेबान हूँ मैं............
जाने कितने ही अरमान कुम्प दबा चुका है अपने सिने मे,
अब तो लगता है जैसे खुद ही एक कब्रिस्तान हूँ मैं.

उसने न माना

क्या इससे भी दर्द भरा होगा कोई अफ़साना,
हम जान से जाते रहे और उसने न माना

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

याद कर कर के सौचता हूँ

बिछड़ने वालों आपको याद कर कर के सौचता हूँ,
आप जब फिर मिलोगे तो कितना बदलाव हो चुका होगा

फागुन लायो मस्त बहार

फागुन लायो मस्त बहार ,
डालो सबपे रंग गुलाल |
तन भी रंगें मन भी रंगे ,
भर जाए हर मन में प्यार |
हर और उड़ता रंग गुलाल ,
चलने लगी मस्त बयार |
बढा हाथ मैं लेके रंग ,
देखो सजनी करे मनुहार |
रंग के उसकी चुनर गुलाबी ,
हम भी करेंगे अबकी इज़हार |
अबकी फागुन सब ऐसे खेलो ,
पिचकारी से निकले प्यार |

काजल लगाए तो नही बैठी थी

मैं था जगा कल कि रात हुई कुछ बात ऐसी कि फूल भी फीके पड़ गये थे,
सितारे भी कुछ दिनों से थे गायब कल क़ी रात चमक कर इतरा रहे थे,
चंदा भी शरमा रहा था बदलियाँ होती तो वो भी ओट ले लेता,
कहीं तुम आँख में काजल लगाए तो नही बैठी थी

त्योहार है ये रंगों का

अनेक रंग है इस पर्व के, अनेक रंग समेटे है ये
त्योहार है ये रंगों का, अनेक रंग समेटे है ये
पर्व ये ऐसा जब रंग सारे खिलते है,
बैर और दुश्मनी के दंभ सारे धुलते हैं,
बहता है रंग जो चहुं ओर
मित्रता के संगत बनते हैं
पर्व ये ऐसा जब रंग सारे खिलते है,
प्रीत की रीत के परि‍णय बनते हैं,
होती है मादकता हर ओर
प्रेम के मधुर पग बढ़ते हैं
पर्व ये ऐसा जब रंग सारे खिलते हैं,
जीवन पे पसरी नीरसता मिटती है,
होती है प्रसन्नता सभी ओर
नयी उमंग में सब संग बढ़ते है
अनेक रंग है इस पर्व के, अनेक रंग समेटे है ये
त्योहार है ये रंगों का, अनेक रंग समेटे है ये

किसका दीवाना था

किसका दीवाना था किसको याद है अब...
,मुद्दत हो गई,पूछने वाले तुझी से मिलता जुलता नाम था

कोई वास्ता नहीं?

बेगानावार ऐसे वो गुज़रे करीब से !
जैसे कि उनको मुझसे कोई वास्ता नहीं !!

कौन न मर जाए

इस सादगी पे कौन न मर जाए ए खुदा,
लड़ते है और हाथ मे तलवार भी नही.

इक ऐसा राज

इक ऐसा राज दिया है मुझे छुपाने को,
जिसे वो खुद भी छिपाएँ, कभी छुपा न सके

किस्मत जुदा जुदा है

दौ फूल साथ साथ फूले, देखो किस्मत जुदा जुदा है,
इक चढ़ाया जा रहा है कब्र पे, एक ताज पर लगाया जा रहा है

बिगड़ता क्या है

बोसा देने मे जो पूछा कि बिगड़ता क्या है,
बोले-लेने मे कहो,आपको क्या मिलता है

कोई आ जायेगा

एक बोसे के लिए हम रात भर तडपा किये,
जब कहा, बस यूँ कहाँ..........ठहरो.........कोई आ जायेगा

नींद भी ले गये

वो क्या गये कि नींद भी आँखो से ले गये,
यानि कि ख्वाब मे भी न आए तमाम रात

इंतजार मे काट चुका हूँ जिंदगी

आधी से ज़्यादा गम ए इंतजार मे काट चुका हूँ जिंदगी,
अब भी अगर आ जाओ तो यह जिंदगी बहुत बड़ी है

क्रिकेट क़ी बाज़ी

इस ख्याल से ना खेलना क्रिकेट क़ी बाज़ी,
कि अपनी फ़तह समझते रहो मात होने तक

हाथ चेहरे पर

हश्र मे शरमा के उसने हाथ चेहरे पर रख दिया,
बात दिल क़ी होठों पर अख्तियार आने को थी

आँखो का इशारा

करवट सी बदलता है जो रह रह के जमाना,
यह आपकी आँखो का इशारा तो नही है.

फ़तह हिन्दुस्तान क़ी

बुलंदी को आज हम छू लेंगे,
फ़तह हिन्दुस्तान क़ी कर लेंगे,
खिलेंगे चेहरे बजाके डंका,
ढेर हो जाएगी पूरी लंका,
सचिन क़ी तमन्ना होगी पूरी,
मुरली क़ी आस रहेगी अधूरी