मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

कुंपसिंह का सलाम


जाते जाते मेरा पैगाम लेता जा हे दिनकर.......
मेरे सभी दोस्तो को सलाम कहता जा हे प्रभाकर.....
दिनभर के कहानियों की दास्तान ब्यान करता जा हे भानु......
आने वाली रात की कहानी बताता जा हे भास्कर..............
कल जल्दी लौट आना हे धूपकर......
...उदय होते ही मुझे जल्दी जगाना हे सूरज...............
तुझे उठाते ही नमस्कार करता हूँ रोज में रवि...............
टे ही गाथाएँ गाये हर शायर और कवि.........................
तुझे मिहिर भी कोई कहता है कोई कहे रोहित....
तुम्हारी दीवानी सी रहती है सदा चाँदनी रात तुझपे मोहित.......
अरुण नाम भी है तेरा....अटल अवि है तू सदा ही वक्त पर है आता.....
दीपेश और सुकेत भी तेरी रोशनी मे जगमगाएँ सारा जहाँ है गाता.......
कुंपसिंह का सलाम लेता जा हे आदित्य.....कल जल्दी लौट आना फिर जगमगाता...सभी मित्रो को इस निराली शाम का सलाम.........

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